यूकेडी पार्ट 2- कैसे हुई उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना?
इंद्रमणि बडोनी के साथ काशी सिंह ऐरी
70 के दशक तक पृथक राज्य उत्तराखंड की मांग धीरे-धीरे ही सही बढ़ने लगी थी। इसी मांग को और तेज करने के लिए मानवेंद्र शाह का दायां हाथ रहे और हिमालय टाइम्स के संपादक द्वारिका प्रसाद उनियाल ने 24-25 जुलाई, 1979 को एक बैठक आहुत की। मसूरी में होने वाली इस बैठक के लिए उनियाल ने कई बुद्धिजीवियों को न्यौता भेजा। उन्होंने हाल ही में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति पद से रिटायर हुए डॉ. देवी दत्त पंत को भी न्यौता दिया।

मसूरी में जब बैठक हुई तो इसमें पंत, इंद्रमणि बडोनी समेत कुल 53 लोग शामिल हुए। बैठक हुई तो यहां पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कौन करेगा, इसको लेकर ही खींचतान शुरू हो गई। और निर्विवाद होने की वजह से डॉ. पंत को सम्मेलन का अध्यक्ष बनाया गया। इसी बैठक में चर्चा हुई कि अलग उत्तराखंड राज्य की लड़ाई अब राजनीतिक रास्ते से लड़नी होगी। और इस सोच को मूर्त रूप देने के लिए उत्तराखंड क्रांति दल नाम का राजनीतिक संगठन बनाने का फैसला लिया गया। और डॉ. डी डी पंत को इसका पहला कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
बैठक में संकल्प लिया गया कि उत्तर प्रदेश का विभाजन अब जरूरी हो गया है। ताकि यूपी के आठ पर्वतीय जिलों को चंद, कत्यूरी और पंवार राज्य वंशों की सीमा के सभी क्षेत्रों के साथ अलग राज्य बनाया जा सके। हमारा प्रस्तावित क्षेत्रीय राजनीतिक दल यानी कि उक्रांद यहां की धरती, यहां के पहाड़, खनिज, स्रोत और यहां के परिवारों के हित के लिए घोषणा पत्र एवं नियोजन कार्यक्रम बनाएगा। उपस्थित हम सब 53 लोग इसकी प्राप्ति का संकल्प करते हैं। और इस तरह उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना हुई।
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पंत ने काशी सिंह ऐरी और इंद्रमणि बडोनी जैसे कई दिग्गजों को उक्रांद से जोड़ने का काम किया। उन्होंने अन्य कई प्रभावशाली व्यक्तियों को भी पत्र भेजे लेकिन प्रयास सफल नहीं रहे। और इस तरह अलग उत्तराखंड राज्य की मांग के लिए एक राजनीतिक दल का उदय हो गया था।
