बद्रीनाथ मंदिर में किसने की चोरी? अब तक क्या-क्या हुआ?
बद्रीनाथ मंदिर में चोरी का मामला
बद्रीनाथ मंदिर में चोरी का मामला बड़ा होता जा रहा है। पहले जहां चोरी का सिर्फ आरोप था, वहां अब प्रथम दृष्टया चोरी की बात सामने आ चुकी है। अब चोरी का आरोप सिर्फ दान पात्रों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसमें वीआईपी दर्शन के नाम पर भी चोरी करने की बात निकलकर आ रही है। बद्रीनाथ मंदिर में चोरी की जांच के लिए कमिटी बन चुकी है। पुलिस की तरफ से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन हो चुका है। और पूरी दान व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए भी शासन स्तर पर एक कमिटी बनाई गई है।
मौजूदा अपडेट क्या है?
प्रमोद नौटियाल पर एफआईआर होने के बाद वह हाईकोर्ट की शरण में चला गया है। प्रमोद नौटियाल ने कोर्ट में निलंबन आदेश और पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। इस पर कोर्ट ने बीकेटीसी से जवाब मांगा है और अपना रुख साफ करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी। तब तक जांच लगातार जारी है। मंदिर समिति अपनी जांच रिपोर्ट सौंप चुकी है। और शासन की तरफ से बनाई जांच समिति भी 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेंगी। इसके अलावा प्रमोद नौटियाल ने उन आरोपों का जवाब भी दिया है जिसमें बताया जा रहा था कि वह मोबाइल के नीचे नोटों की गड्डी छुपाकर लेकर गया? इस बीकेटीसी को भेजे जवाब में नौटियाल ने कहा है कि वह नोटों की गड्डी नहीं बल्कि नोटबुक थी। अब इस पूरे मामले का क्या सच है, यह तो जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा।
कैसे संज्ञान में आया मामला?
मामले की शुरुआत हिंदूवादी संगठन भैरव सेना के आरोपों से होती है। तीन जुलाई को भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी कि BKTC के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने दावा किया कि उन्हें बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में गड़बड़ी की जानकारी मिली है। उन्होंने लिखा कि बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित रूप से चोरी की घटना हुई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि इस चोरी में बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सचिव प्रमुख आरोपी हैं और उन्होंने सेंधमारी की है। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि दो जुलाई की सुबह करीब साढ़े आठ बजे चढ़ावे की गणना हुई। इस दौरान चढ़ावे की चोरी की घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई। संदीप खत्री ने कहा कि उनके पास सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है और उन्हें यह जानकारी मंदिर के सूत्रों ने दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल
यह मामला तब लाइमलाइट में आया जब खत्री का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। वायरल होने के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्ववेदी ने इस मामले में जांच की आदेश दिए और एक समिति बनाकर जांच शुरू करवा दी। साथ ही दान की गिनती करने वाले सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। द्विवेदी ने ये भी साफ किया कि जिस व्यक्ति को उनका निजी सचिव बताया जा रहा है, वह उनका निजी सचिव नहीं है। यह व्यक्ति मंदिर समिति का नियमित कर्मचारी है और ये सालों से मंदिर में वैयक्तिक सहायक के रूप में काम कर रहा है। यहां पर इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल की बात हो रही है। अब प्रमोद नौटियाल पर भी विस्तार से बात करेंगे लेकिन पहले सिलसिलेवार पूरे घटनाक्रम को जान लेते हैं। चार जुलाई को बीकेटीसी के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि सीसीटीवी की जांच की गई है लेकिन आरोपी की सूरत स्पष्ट नहीं है। हालांकि बाद में सीसीटीवी जांच में पूरा सच सामने आ गया।
विपक्ष हमलावर
पांच जुलाई को पता चला कि एक जून को ही मंदिर के सभी सीसीटीवी चेंज कर दिए गए थे। इस पर बीकेटीसी अध्यक्ष ने बताया कि वह सामान्य प्रक्रिया थी। और मंदिर समिति के पास पुराना रिकॉर्ड डीवीआर में सुरक्षित है। अब तक मामला उछलने लगा। कांग्रेस और पंडा समाज ने भी इसको लेकर बीकेटीसी को घेरना शुरू कर दिया। सात जुलाई तक यह मामला काफी तूल पकड़ने लगा और कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मंदिर के बाहर मौन व्रत पर बैठ गए। ये लोग मामले में एसआईटी जांच की मांग उठाने लगे। आठ जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पर पहली प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा कि मंदिर से चढ़ावे की चोरी करना गौ हत्या और माता-पिता की हत्या करने जैसा है। और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सीसीटीवी में मिला अहम सबूत
पुलिस की तरफ से सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई तो प्रमोद नौटियाल पर लगे आरोप पुख्ता होते दिखे। सीसीटीवी में साफ दिखा कि नौटियाल मोबाइल के नीचे नोटों की गड्डी जैसा कुछ छुपाकर लेकर जा रहा है। सीसीटीवी में दिखा कि दो जुलाई की सुबह 9 बजकर 34 मिनट पर नौटियाल गणना कक्ष से बाहर आता दिखाई दिया और उसके हाथ में मोबाइल के नीचे नोटों की गड्डी जैसी वस्तु नजर आ रही है। इस सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया। और 8 जुलाई को पहली बार नौटियाल को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज की गई।
2 जुलाई को क्या–क्या हुआ?
दरअसल दो जुलाई को चढ़ावे की गणना सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर के डेढ़ बजे तक चली। यह गणना बद्रीनाथ धाम के परिक्रमा स्थल स्थित सभागार में हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उस दिन 16 लाख से अधिक धनराशि पांच दान पात्रों से प्राप्त हुई। जब ये गणना हो रही थी तब वहां पर मंदिर समिति के चार कर्मचारी तैनात थे। गिनती में नियमानुसर श्रद्धालु भी शामिल थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मौके पर एक प्रोटोकॉल अधिकारी मोबाइल के नीचे नोटों की गड्डियां ले जाते हुए देखा गया। बताया जा रहा है कि वहां मौजूदा साधुओं ने इसका विरोध भी किया। इसके बाद ही यह मामला उछला है।
एक और गंभीर आरोप
प्रमोद नौटियाल पर दान चोरी के अलावा एक और गंभीर आरोप लगा है। दैनिक जागरण की इस रिपोर्ट के मुताविक आरोपी प्रमोद नौटियाल यहां वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली भी करता था। नियमों के मुताबिक अलग-अलग पूजा की दरें तय करने और शुल्क वसूलने का अधिकार सिर्फ बीकेटीसी के पास है। लेकिन इसके बावजूद नौटियाल बिना मंदिर समिति के प्रस्ताव के वीआईपी दर्शन के नाम पर प्रति श्रद्धालु 1100 रुपए वसूल रहा था। रिपोर्ट बताती है कि 29 जून को मंदिर समिति बोर्ड में कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया और प्रस्ताव लाए बिना श्रद्धालुओं से 1,100 रुपये वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूले जाने लगे। इसको लेकर मंदिर के पुजारियों एवं अन्य लोगों ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सति के हवाले से बताया गया है कि वीआईपी दर्शन शुल्क संबंधी प्रस्ताव पर समिति की बोर्ड बैठक में चर्चा नहीं हुई। वहां सिर्फ पूजा शुल्क बढ़ाने को लेकर फैसला हुआ था। यानि कि अगर प्रमोद नौटियाल ने वीआईपी दर्शन के नाम पर पैसे वसूले हैं तो यह उनका एक और कांड साबित होता है।
कौन हैं प्रमोद नौटियाल?
बद्रीनाथ मंदिर में दान चोरी के इस पूरे प्रकरण में प्रमोद नौटियाल का नाम सबसे ऊपर है। ज्यादातर रिपोर्ट्स में उन्हें बीकेटीसी अध्यक्ष का निजी सचिव बताया गया है। हालांकि बीकेटीसी अध्यक्ष ने इस बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह मंदिर के सिर्फ एक कर्मचारी मात्र हैं। हालांकि प्रमोद नौटियाल बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्षों के भी पीए रह चुके हैं। अब भले ही द्विवेदी नौटियाल के उनके निजी सचिव होने से इनकार करें लेकिन जिस तरह की कृपा समिति की नौटियाल पर रही है उससे दाल में कुछ काला जरूर नजर आता है। दरअसल जिस तेजी से प्रमोद नौटियाल का करियर ग्राफ चढ़ा है, उससे भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दैनिक हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक प्रमोद नौटियाल साल 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के एकल पद पर नियुक्त हुए थे। यह एक ऐसा पद था जहां पर प्रमोशन संभव भी नहीं था। लेकिन इसके बावजूद 2018 में प्रमोशन दिया गया और उन्हें सीधी भर्ती वाले व्यक्तिगत सहायक के पद पर नियुक्त कर दिया गया। नौटियाल के अच्छे दिन यहीं तक नहीं थमे बल्कि 2023 में उन पर और विशेष कृपा की गई। इस दौरान मंदिर समिति की नियमावली में बदलाव किया गया और उनकी जनसंपर्क विशेष अधिकारी के पद पर प्रोन्नति का रास्ता भी खोल दिया गया। आरोप लगाए जा रहे हैं कि बीकेटीसी अध्यक्ष का निजी सहायक होने के बावजूद भी उन्हें चढ़ावा गणना के काम में लगाया गया। यानि कि साफ है कि प्रमोद नौटियाल पर विशेष कृपा रही है और इससे यह जरूर आशंका खड़ी हो जाती है कि वह इस खेल में कम से कम अकेले तो नहीं शामिल था।
बद्रीनाथ धाम में कैसे होती है गिनती?
बद्रीनाथ धाम में पांच दान पात्र हैं। इनमें से दो गर्भगृह और तीन मंदिर परिक्रमा स्थल पर लगे हुए हैं। इन्हें थाली भेंट के नाम से जाना जाता है। इन दान पात्रों को एक-एक कर खाली किया जाता है। दान की राशि गिनने के लिए मंदिर कर्मचारियों को लगाया जाता है। यह गिनती सीसीटीवी और मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में होती है। इस मौके पर कुछ श्रद्धालुओं को भी शामिल करने का प्रोटोकॉल है। इन श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड भी रखा जाता है। जैसे ही गिनती पूरी होती है, वैसे ही पूरी राशि बैंक कर्मचारी के सुपुर्द कर दी जाती है। बैंक कर्मचारी इस राशि की दोबारा गिनती कर उसे बैंक में जमा कर देता है। वहीं, जो सोना-चांदी या अन्य वस्तुएं दान में मिलती हैं उन्हें मंदिर समिति के खजाने में जमा कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन दिन लगते हैं। नौटियाल पर गिनती के दौरान ही नोट की गड्डी उठाने का आरोप लगा है।
अब एक तरफ मामला हाईकोर्ट मे है तो दूसरी तरफ, सरकार की जांच समिति भी जांच में जुटी हुई है। 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपी जानी है। अब देखना होगा कि हाईकोर्ट में बीकेटीसी की तरफ से क्या जवाब दाखिल किया जाता है और जांच रिपोर्ट में आगे क्या सामने आता है।
