सुनो पहाड़ियों… मोदी-मोदी कहकर नहीं चलेगा

बंशीधर भगत

बंशीधर भगत

18 अप्रैल को कालाढूंगी से भाजपा विधायक बंशीधर भगत ने वो कह दिया है जो इस सरकार की सच्चाई बन चुकी है। यहां अगर एक नल का भी उद्घाटन कोई नेता करता है तो वो भी मोदी जी के अथक प्रयासों से ही होता है। अब बंशीधर भगत ने भले ही वह बात जल जीवन मिशन के अधिकारियों के लिए कही लेकिन यह बात सभी पहाड़ियों पर भी लागू होती है। पहाड़ियों को भी बंशीधर भगत को सुनने की जरूरत है। लेकिन क्यों? अब इस क्यों का जवाब लेने से पहले बंशीधर भगत ने कहा क्या?, वो जान लीजिए।

जल संसाधन विकास के अधिकारियों के साथ कालाढूंगी विधायक बैठक कर रहे थे। इस बैठक में उन्होंने विभाग के काम को लेकर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने कहा, “2027 में मुश्किल हो जाएगा। मोदी-मोदी कहने से काम नहीं चलेगा।” यह बयान जब वायरल हुआ तो इस पर काफी बवाल भी हुआ। बाद में बंशीधर भगत ने सफाई पेश की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की। भगत ने कहा कि उन्होंने कोई भी ऐसी बात नहीं बोली कि जो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ हो। लेकिन जो बात पहली बार में बाहर आई, वही सच थी। वही सच बात पहाड़ियों को भी समझने और अपनाने की ज़रूरत है।  अगर नहीं करेंगे तो तुम अस्पताल, स्कूल मांगों चाहे गैरसैंण राजधानी। मिलना वही है जो ये देते आ रहे हैं। और वो है धर्म के नाम पर फूट डालना और पहाड़ के मुद्दों से ध्यान भटकाना।  

बंशीधर भगत ने अधिकारियों से साफ कहा कि मोदी-मोदी करने से काम नहीं चलेगा। जी हां। आप भी ये बात समझ लीजिए कि मोदी-मोदी करने से आपका भी काम नहीं चलने वाला है। अब आप बोलेंगे कि हम क्या मोदी-मोदी करते हैं? तो जवाब आपके पास ही है। पहाड़ के गांव-देहातों में और कुछ हद तक शहरों में भी लोग, स्थानीय नेता का चेहरा देखकर नहीं बल्कि मोदी जी के नाम पर वोट डालते हैं। और ये बात खुद मोदी जी भी जानते हैं। इसीलिए हर रैली में वो अपने नाम पर वोट मांगते हैं।

पहाड़ी गांवों का तो ये हाल है कि जब लोग वोट देने जाते हैं तो वो ये नहीं देखते कि उनका स्थानीय उम्मीदवार कौन है? वो सिर्फ एक बात जानते हैं कि उन्हें मोदी जी के कमल पर वोट देना है। क्योंकि मोदी जी ने कहा था। फिर चाहे उस कमल के सामने खड़ा उम्मीदवार कोई गुंडा हो या फिर देवता। कोई फर्क नहीं पड़ता।  लेकिन जरा सोचिए आप पिछले कुछ सालों से मोदी-मोदी के नारे लगा रहे हैं लेकिन क्या दिल्ली में बैठे मोदी जी आपके गांव की सड़क, कस्बे का अस्पताल या आपके बच्चों के स्कूल की छत ठीक करने आएंगे? नहीं ना। 

हम ‘चेहरे’ के मोह में इतने अंधे हो जा रहे हैं कि हम भूल जाते हैं कि विधानसभा में हमारी आवाज मोदी जी नहीं बल्कि वो स्थानीय उ्म्मीदवार उठाएगा जिसे हमने चुना है। जब आप सिर्फ एक नाम पर वोट देते हैं, तो स्थानीय विधायक ‘बेलगाम’ हो सकते हैं। उन्हें पता है कि काम करें या न करें, अगली बार भी मोदी जी के नाम पर वोट मिल ही जाएगा। इसी ‘मोदी-मोदी’ के शोर में आपका थूक जिहाद और लैंड जिहाद तो खूब सुनाई देता है लेकिन पलायन, बेरोजगारी और भू-कानून जैसे मुद्दे आपके कान तक नहीं पहुंचते।

यह लेख मोदी विरोधी नहीं है और ना ही इसका विरोध है कि आप प्रधानमंत्री मोदी को पसंद करते हैं। लेकिन आपकी ये भक्ति जब अंधभक्ति में बदल जाती है तो आपका अपना नुकसान होता है। देखिए अगर आपका विधायक खराब प्रदर्शन कर रहा है, तो आप उससे सवाल पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाते क्योंकि आपने उसे उसके काम पर नहीं, बल्कि मोदी जी के नाम पर चुना था। जब विधायकों को पता होता है कि मोदी या किसी फलां नेता के नाम पर वोट मिलने हैं तो वो अपनी तरफ से मेहनत भी नहीं करेंगे। और ऐसे में अक्सर विधायक निधि का करोड़ों रुपया या तो खर्च ही नहीं हो पाता या गलत जगह लग जाता है। क्योंकि जनता विधायक की परफॉर्मेंस की जगह पार्टी की लहर देखती है।

पिछले 25 साल से अगर आज भी आप सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। 25 सालों से अगर आप आज भी पलायन-पलायन चिल्ला रहे हैं तो इसमें गलती सरकारों की नहीं… बल्कि आप और हम जैसे वोटरों की है… जिन्होंने कभी पार्टी के नाम पर तो कभी लोकप्रिय चेहरे के नाम पर वोट दिया।… आपने कभी ये नहीं देखा कि आपके क्षेत्र का विकास करने के लिए कौन सा व्यक्ति सही होगा।… आपने सिर्फ ये देखा कि कौन सी पार्टी या कौन-सा व्यक्ति दिख रहा है, उसी पर वोट दे दो। और इस तरह उत्तराखंडियों ने शुरुआत की इस नए नवेले राज्य को प्रयोगशाला बनाने की। यहां नेता आते हैं। राजनीतिक प्रयोग करते हैं और चले जाते हैं। और मोदी जी… मेरा भै-बैणों बोल देते हैं… और हम पहाड़ी उसी में खुश हो जाते हैं।

इस तरह आम पहाड़ी कभी पलायन का तो कभी अस्पताल का झुनझुना बजाकर रह जाता है और हमारे नेता निवातु पाकर सुनिंद सो जाते हैं। इसलिए अगर उत्तराखंड के और अपने पहाड़ के हालात सच में बदलने हैं तो हिंदू-मुस्लिम करने वालों को नहीं बल्कि विकास की बात करने वालों को चुनें। उन लोगों को चुनें जो आपके घर की, आपके क्षेत्र की समस्याओं को उठाए और उनका समाधान करे ना कि उनको चुनें जो आपको धर्म का धतुरा पिलाकर मदमस्त कर देते हैं और फिर आप भी व्हाट्सऐप पर हिंदू-मुस्लिम की दुकान चलाने लग जाते हैं।

याद रखें मोदी जी देश संभाल रहे हैं। अगर इसे संभालना कहें भी तो। मोदी जी देश की सत्ता संभाल रहे हैं लेकिन आपका मोहल्ला, आपका जिला और आपका उत्तराखंड आपके विधायक को संभालना है। अगली बार जब वोट देने जाएं तो बंशीधर भगत की बात याद रखें कि 2027 में मोदी-मोदी कहने से नहीं चलेगा… बल्कि सही व्यक्ति को चुनने से काम बनेगा। ये ना देखें कि ऊपर कौन बैठा है, बल्कि ये देखें कि आपके बीच कौन खड़ा है। उम्मीदवार की योग्यता देखें, उसकी शिक्षा देखें और उसका पिछला रिकॉर्ड देखें। सिर्फ नारे लगाने से राज्य का भला नहीं होगा, सही इंसान चुनने से होगा। भू-कानून और मूल निवास के लिए सोशल मीडिया पर हल्ला मचाने से अधिकार नहीं मिलेंगे.. सही व्यक्ति को वोट देने से मिलेंगे। बंशीधर भगत जी के बहाने ही सही लेकिन सोचिएगा जरूर और  याद रखिएगा कि उत्तराखंड के हालात बदलने हैं तो मोदी-मोदी कहने से काम नहीं चलेगा। सही को चुनने से ही काम बनेगा। ये तो मेरे विचार हैं लेकिन आप इस पूरे मुद्दे पर क्या सोचते हैं, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आपके सुझाव और आलोचना… दोनों का तहेदिल से स्वागत। 

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