सड़क हादसे में घायल हुए तो सरकार उठाएगी इलाज का खर्चा!
Road Accident
देश में सड़क हादसे होने की खबरें हर गुजरते दिन के साथ सामने आती रहती हैं। सेव लाइफ फाउंडेशन एवं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से किए गया एक अध्ययन बताता है कि भारत सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामले में विश्वभर में पहले नंबर पर है। 2023 और 2024 के आंकड़े बताते हैं कि देशभर में करीब 9.68 लाख सड़क हादसे हुए। इन हादसों में 35 लाख लोगों की जानें चली गईं। भारत की तुलना में चीन में 36 फीसदी तो अमेरिका में करीब 25 फीसदी सड़क दुर्घटनाओं में मौतें होती हैं।
सड़क दुर्घटनाओं में अगर तुंरत इलाज मिल जाए तो घायलों के जीवित रहने की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। लेकिन यह संभावनाएं तब क्षीण हो जाती हैं जब कई बार राहगीर पुलिस के डर से घायल को अस्पताल पहुंचाने का कष्ट नहीं उठाते। दूसरी तरफ, कई बार जेब में पैसे ना होने की वजह से भी समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इन परिस्थितियों का अब सरकार ने भी संज्ञान लिया है और एक ऐसी योजना शुरू की है जिससे घायलों को समय पर मुफ्त इलाज मिल सके। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री राहत सड़क दुर्घटना पीड़ित योजना शुरू की है। इस योजना की बदौलत घायलों का त्वरित इलाज संभव हो सकेगा और पैसों की कमी की वजह से कोई भी इलाज से वंचित नहीं होगा।
भारत सड़क दुर्घटनाओं के लिए कुख्यात है। कई अध्ययन बताते हैं कि सड़क हादसों में होने वाली 50 फीसदी मौतों को टाला जा सकता है, अगर घायल को गोल्डन ऑवर के पहले घंटे के भीतर उचित उपचार मिल जाए। गोल्डन आवर का मतलब दुर्घटना के बाद का पहाल घंटा है जो काफी महत्वपूर्ण होता है। देश में होने वाले हादसे में यह पहला घंटा अक्सर एंबुलेंस के इंतजार में, अस्पताल की कागजी कार्रवाई में और पैसों का इंतजाम करने में ही खत्म हो जाता है। प्रधानमंत्री राहत योजना का मूल उद्देश्य इसी गोल्डन ऑवर को बचाना है। सरकार ने यह समझा है कि सड़क पर पड़े घायल के लिए वह एक-एक मिनट कीमती है। अगर उस वक्त उसे यह भरोसा मिल जाए कि उसकी जान की कीमत किसी गारंटी या बीमे के कागज से कहीं ज्यादा है तो हम हर साल लाखों जिंदगियां बचा सकते हैं।
योजना में क्या मिलेगा?
प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क हादसों में मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। अस्पताल में इलाज भी कैशलेस होगा। अक्सर देखा गया है कि निजी अस्पताल एक्सीडेंट के केस लेने से कतराते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें दवाइयों के बिलों के भुगतान को लेकर चिंता होती है। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित को डेढ़ लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। दुर्घटना की तारीख से लेकर अगले 7 दिनों तक अस्पताल में होने वाले उपचार का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। यह वह समय होता है जब मरीज की स्थिति सबसे ज्यादा नाजुक होती है और परिवार सदमे में होता है। इस योजना का दायरा सिर्फ नेशनल हाइवे तक नहीं सीमित रखा गया है। इसकी परिधि में राज्य का राजमार्ग भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही आपके गांव की कोई संकरी कच्ची सड़क भी है तो वह भी इस योजना के तहत सम्मिलित है। इसका मतलब यह वह कि देश की लगभग किसी भी सड़क पर अगर हादसा हुआ तो पीड़ित इस योजना के हकदार होंगे।
कैसे मिलेगा फायदा?
सड़क दुर्घटना होने पर सबसे बड़ी समस्या सूचना और समन्वय की होती है। केंद्र सरकार ने इसके लिए 112 हेल्पलाइन रखी है। अगर किसी को भी इस योजना का लाभ लेना है तो उसे इस हेल्पलाइन पर सड़क हादसे और पीड़ित की जानकारी देनी होगी। सबसे अच्छी बात यह है कि यह सूचना पीड़ित तो दे ही सकता है लेकिन कोई नेक राहगीर भी इसकी जानकारी हेल्पलाइन पर फोन करके दे सकता है। जैसे ही आप हेल्पलाइन नंबर पर जानकारी देंगे, वैसे ही पूरा सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। आपका फोन पहुंचने के बाद सिस्टम जीपीएस के माध्यम से लोकेशन ट्रैक करता है। नजदीकी नामित यानी एंपेनल्ड अस्पताल को अलर्ट भेजा जाता है। इसके अलावा एंबुलेंस की रीयल टाइम मैपिंग की जाती है। पुलिस और अस्पताल के बीच एक डिजिटल ब्रिज बन जाता है। यहां एंबुलेंस घायल पीड़ित को अस्पताल पहुंचाती है और वहां बिना किसी देरी के इलाज शुरू हो जाता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही
अक्सर सरकारी योजनाओं के नाम पर भ्रष्टाचार और देरी की शिकायतें आती हैं, लेकिन पीएम राहत योजना को टेक्नोलॉजी ड्रिवन बनाया गया है। पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रोनिक डिटेल्ड एक्सिडेंट रिपोर्ट (eDAR) प्लेटफॉर्म पर आधारित है। अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक का सारा डाटा ऑनलाइन अपलोड होता है। पुलिस वेरिफिकेशन के लिए भी सख्त समयसीमा तय की गई है। अगर मरीज की जान को तत्काल खतरा नहीं है तो पुलिस को 24 घंटे के भीतर वेरिफिकेशन पूरा करना होगा। यदि स्थिति बेहद गंभीर है तो यह सीमा 48 घंटे की है।
अस्पताल की दिक्कत भी खत्म
अक्सर कैशलेस इलाज में अस्पतालों के लिए अनुपाल का काम काफी ज्यादा बढ़ जाता है लेकिन इस योजना के तहत उनका काम आसान कर दिया गया है। अस्पताल को भुगतान के लिए मरीज के पीछे नहीं भागना होगा। पैसा सीधे मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड (एमवीएएफ) से अस्पताल के खाते में जाएगा। यदि गाड़ी का बीमा है तो बीमा कंपनियां फंड देंगी और यदि मामला हिट एंड रन का है तो सरकार अपने बजट से भुगतान करेगी।
पुलिस का डर खत्म
सालों से हमारे समाज में एक डर व्याप्त था कि अगर मैंने घायल की मदद की तो पुलिस मुझे चक्कर कटवाएगी। कुछ लोग यह भी डरते हैं कि अस्पताल उनसे ही पैसे मांगेगा। प्रधानमंत्री राहत योजना ने इस डर की दीवार को ढहा दिया है। अब एक राहगीर बिना किसी वित्तीय या कानूनी बोझ के किसी की जान बचा सकता है। यह योजना एक नागरिक के तौर पर हमें और अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील बनाती है। मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए एक सड़क हादसा केवल शारीरिक चोट नहीं होता बल्कि यह उन्हें गरीबी के कुचक्र में धकेल देता है। घर का मुखिया अगर घायल हो जाए तो इलाज का खर्च और कमाई का बंद होना परिवार को तोड़ देता है। डेढ़ लाख रुपए की यह तात्कालिक सहायता उस परिवार को बिखरने से बचा लेती है। यह एक सामाजिक सुरक्षा नेट की तरह काम करता है जो वक्त पड़ने पर किसी भी नागरिक को गिरने से थाम लेने की ताकत रखता है।
कैसे सफल होगी योजना?
इस योजना की सफलता का एक बड़ा दारोमदार देश के अस्पतालों और डॉक्टरों पर है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अस्पताल अब पैसे की कमी का बहाना बनाकर मरीज को रेफर नहीं कर सकते। राज्य की स्वास्थ्य एजेंसियां 10 दिनों के भीतर दावों का निपटान करेंगी। इससे अस्पतालों का कैश फ्लो बना रहेगा। यह निजी और सरकारी अस्पतालों के बीच एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करेगा जहां मरीज की जान बचाना ही सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
सड़कें किसी भी देश की प्रगति की धमनियां होती हैं, लेकिन इन धमनियों में खून नहीं बहना चाहिए। पीएम राहत योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक सुधार है। यह योजना हमें याद दिलाती है कि विकास केवल चमकदार सड़कों और फ्लाइओवर बनाने से नहीं आता बल्कि विकास तब होता है जब उन सड़कों पर चलने वाले अंतिम व्यक्ति की जान की सुरक्षा सुनिश्चित हो। एक समाज के तौर पर हमारी भी जिम्मेदारी है। हमें 112 नंबर को हर मोबाइल का हिस्सा बनाना होगा और इस योजना की जानकारी देश के कोने-कोने तक पहुंचानी होगी। सड़क हादसों को पूरी तरह रोकना शायद संभव न हो लेकिन हादसे के बाद कोई बेसहारा ना रहे, यह हम सुनिश्चित करना होगा। पीएम राहत योजना केवल एक पॉलिसी नहीं, यह भारत के प्रत्येक नागरिक को दिया गया एक जीवन दान है। अब वक्त है कि हम सड़कों पर चलते हुए डरें नहीं क्योंकि अब सरकार हमारे साथ एक अदृश्य सुरक्षा कवच के रूप में हर पल मौजूद है।
