आपके फोन कॉल होंगे सस्ते, ट्राई ने लाया प्रस्ताव


फ़ोन कॉल होंगे सस्ते

फ़ोन कॉल होंगे सस्ते

मोबाइल उपभोक्ताओं की एक बड़ी शिकायत टेलीकॉम कंपनियों से रहती है। शिकायत यह है कि सिर्फ टॉकटाइम वाले रिचार्ज क्यों नहीं देते? वर्तमान समय में अगर डाटा नहीं चाहिए और सिर्फ कॉल व एसएमएस करने के लिए रिचार्ज कर रहे हैं तो विकल्प मौजूद नहीं है। मजबूरन आम आदमी को डाटा और टॉकटाइम वाले महंगे रिचार्ज करने पड़ते हैं। इससे टेलीकॉम कंपनियों की तो अच्छी कमाई हो जाती है लेकिन उपभोक्ताओं की जेब पर यह काफी बोझ डालता है। आम लोगों की इसी तकलीफ को ध्यान में रखते हुए ट्राई एक प्रस्ताव पर काम कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो बिना डाटा वाले मोबाइल रिचार्ज सस्ते हो सकते हैं। ट्राई यानी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण विनियम, 2026 का एक नया मसौदा जारी किया है। इस मसौदे का मुख्य उद्देश्य डाटा नहीं चाहिए तो उसका पैसा क्यों दें वाली तर्ज पर है। ट्राई ने इस प्रस्ताव पर सभी पक्षों के सुझाव मांगे हैं। इन सुझावों के आने के बाद इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा।

क्या है ट्राई का प्रस्ताव
दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण विनियम, 2026 में केवल कॉल-एसएमएस पैक लाने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान समय में कंपनियां कॉल-एसएमएस वाले पैक देती भी हैं तो वह काफी सीमित दिनों के लिए होते हैं। इस वजह से उपभोक्ता को प्रति दिन एक जीबी या दो जीबी वाले डाटा के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग वाले पैक खरीदना पड़ता है। ट्राई का प्रस्ताव अगर पारित हो जाता है तो इससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। ट्राई ने प्रस्ताव रखा है कि कंपनियां वर्तमान समय में जितने दिनों का डाटा प्लान लाती हैं, उतने ही दिनों का उन्हें केवल कॉल व एसएमएस वाले प्लान भी लाने होंगे। जैसे कि डाटा पैक आपको सात, 28, 56 या 84 दिन के मिल जाते हैं, प्रस्ताव है कि उतने ही दिन के केवल कॉल व एसएमएस वाले प्लान भी दिए जाएं।

कितने सस्ते हो सकते हैं प्लान?
ट्राई का यह नया प्रस्ताव नियम बनते हैं उपभोक्ताओं को अपने मुताबिक रिचार्ज चुनने की आजादी देगा। माना जा रहा है कि प्लान से डाटा हटने से रिचार्ज 50-70 फीसदी तक सस्ते हो सकते हैं। यानी कि जो प्लान आपको अभी 300 रुपए का पड़ता है, वह सिर्फ कॉल-एसएमएस प्लान होने पर 100 से 150 रुपए तक आ सकता है। इसका फायदा विशेषकर उन लोगों को होगा जो डाटा कम और कॉल के लिए ज्यादा रिचार्ज करते हैं। जैसे कि बुजुर्ग लोग। बुजुर्ग लोग फोन रिचार्ज अधिकतर समय पर सिर्फ कॉलिंग के लिए करते हैं। दूसरा, इसका फायदा उन लोगों को भी मिल सकता है जिनके घर में वाई-फाई लगा है और वे फोन डाटा इस्तेमाल ही नहीं करते हैं। जैसे कि कई हाउसवाइफ घर पर लगे वाई-फाई का उपयोग करती हैं। ऐसे में उनके लिए डाटा वाला प्लान बहुत फायदेमंद साबित नहीं होता है। ग्रामीण भाग में अभी भी कई उपभोक्ता हैं जो फीचर फोन का उपयोग करते हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ कॉलिंग होता है। इन लोगों को इस नए प्रस्ताव का फायदा हो सकता है।

ट्राई के प्रस्ताव में क्याक्या?
– कंपनियों को लाना होगा वॉइस+ एसएमएस ओनली प्लान

– मासिक, त्रैमासिक और सालाना ऑइस ओनली पैक
– डाटा बंडलिंग की अनिवार्यता खत्म
– सीनियर सिटीजन स्पेशल टेलीकॉम प्लान
– ग्रामीण एवं कम आय वाले ग्राहकों के लिए विशेष प्लान
– डाटा यूसेज का पारदर्शी डिस्क्लोजर

जरूरी हो गया था दखल देना
लंबे समय से एक उपभोक्ता वर्ग कॉल-एसएमएस वाले प्लान की चाहत रख रहा था लेकिन उसे नहीं मिल रहे थे। जब तक यह प्रस्ताव पास नहीं हो जाता, शायद तब तक भी नहीं मिलेंगे। इसकी वजह से हर बार उन्हें डाटा वाले रिचार्ज करने पड़ते थे जो काफी महंगे साबित होते हैं। ट्राई भी यह बात समझ चुका था कि कंपनियां ऐसे प्लान लाने के लिए तैयार नहीं हैं जिनमें सिर्फ कॉलिंग एवं एसएमएस की सुविधा हो। ग्राहकों को सही रिचार्ज के विकल्प नहीं मिल रहे थे। इसीलिए ट्राई को दखल देना पड़ रहा है। जल्द ही यह प्रस्ताव अगर नियम बन जाता है तो इससे उपभोक्ताओं को काफी राहत मिल सकती है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि नियम बनने के बाद 6 महीने तक कंपनियों के कामकाज की समीक्षा भी की जाएगी और कुछ भी गड़बड़ी पाई गई तो कंपनियों से जवाब तलब किया जाएगा।

20 हजार करोड़ का बोझ
ट्राई की तरफ से जारी मसौदे में कहा गया है कि भारत में वर्तमान समय में 30 से 35 करोड़ फीचर फोन यूजर होंगे। वहीं, 15 से 20 करोड़ ऐसे उपभोक्ता होंगे जिनकी प्राथमिकता वॉइस कॉलिंग एवं एसएमएस सर्विस है। ट्राई कहता है कि अधिकतर प्लान को डाटा के साथ बंडल करके ही बेचा जाता है, इससे उपभोक्ताओं पर सालाना 15 से 20 हजार करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ पड़ता है। ट्राई ने यह भी साफ किया है कि यह कोई आधिकारिक डाटा नहीं है बल्कि नीतिगत अनुमान हैं। ट्राई कहता है कि जब कंपनियां वॉइस ओनली प्लान नहीं देती हैं तो कंपनियां ग्राहकों से एक तरह से उन चीजों को खरीदने के लिए विवश कर रही होती हैं जो उन्हें नहीं चाहिए। दूसरे किसी सेक्टर में उपभोक्ताओं को विवश करना नियम विरुद्ध माना जाता है। ऐसे में इस सेक्टर में भी इस पर ध्यान देना अनिवार्य हो गया है।

इन्हें डाटा की जरूरत नहीं !

श्रेणी यूजर (लगभग)
बुजुर्ग 6-8 करोड़
ग्रामीण उपभोक्ता 10-15 करोड़
वॉइस ओनली यूजर 12-18 करोड़
एसएमएस+कॉल ओनली यूजर 15-20 करोड़

वॉइस ओनली पैक से क्या बैर?
टेलीकॉम कंपनियों का तर्क है कि बंडल डाटा पैक से प्रति ग्राहक औसत आय (एआरपीयू) बढ़ती है। उनका कहना है कि फोरजी-फाइवजी के युग में वॉइस और डाटा को अलग-अलग करके देखना तकनीकी रूप से उचित नहीं है। इसके लिए कंपनियों की तरफ से तर्क दिया जाता है कि आवाज की सेवा भी आईपी आधारित डाटा नेटवर्क पर ही संचालित होती है। उनके अनुसार डाटा अब केवल मनोरंजन या इंटरनेट ब्राउजिंग का माध्यम नहीं रह गया है। इससे अब यूपीआई भुगतान, ओटीपी सत्यापन, सरकारी डिजिटल सेवाएं, ऑनलाइन शिक्षा जैसे काम हो रहे हैं। कंपनियों का कहना है कि डाटा आज व्यापक डिजिटल समावेशन की बुनियादी जरूरत बन चुका है। कंपनियां कम वैलिडिटी वाले एवं वॉइस ओनली पैक को जोखिम भरा भी बताती हैं। कंपनियों का कहना है कि बेहद सस्ते या बहुत कम वैलिडिटी वाले वॉइस ओनली पैक से सिम धोखाधड़ी, निष्क्रिय नंबरों का दुरुपयोग और अन्य सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं।

कंपनियों से सहमत नहीं उपभोक्ता
कंपनियां भले ही जो तर्क दें लेकिन उपभोक्ता संगठन इनसे सहमत नहीं हैं। संगठनों का कहना है कि यह वास्तविक चुनाव नहीं बल्कि मजबूरी है। बुजुर्गों, ग्रामीण उपभोक्ताओं, फीचर-फोन इस्तेमाल करने वालों और दो सिम रखने वाले लोगों को डाटा की बहुत आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन सिर्फ कंपनियों के प्लान न होने की वजह से उन्हें कॉलिंग के लिए ही डाटा पैक भी खरीदना पड़ता है। वो डाटा पैक जिसे वे शायद कभी उपयोग में भी न लाएं। उपभोक्ता संगठनों का तर्क है कि डिजिटल समावेशन के नाम पर उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय दबाव नहीं डाला जा सकता है।

बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, घटेंगे दाम
कंपनियां भले जो तर्क दें लेकिन ट्राई का साफ कहना है कि डाटा बंडल वाले पैक खरीदने के लिए ग्राहक को विवश करना, नियमानुसार नहीं हो सकता है। इससे संभावना जताई जा रही है कि टेलीकॉम प्राधिकरण का यह प्रस्ताव जल्द ही नियम में बदल जाएगा। ट्राई के प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि सिर्फ कॉलिंग एवं एसएमएस प्लान वाले रिचार्ज का अंतिम दाम कंपनियां ही तय करेंगी। जानकारों का मानना है कि अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने का सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे कॉलिंग वाले प्लान और भी सस्ते हो सकते हैं।

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