पीएम मोदी के बाद उदय कोटक बोले- बड़े झटकों के लिए तैयार रहें

उदय कोटक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद कारोबारी उदय कोटक ने भी चेतावनी जारी कर दी है। कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने कहा है कि स्थिति बिगड़ने वाली है और हमें बड़े झटकों के लिए तैयार रहना होगा। कोटक ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर काफी ज्यादा असर दिख सकता है। CII एनुअल बिजनेस समिट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इस युद्ध का असर हम पर बहुत ज्यादा नहीं हुआ लेकिन अब राहत का वक्त खत्म होने लगा है। उन्होंने कहा कि अगर अब जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो महंगाई, बाजार में गिरावट और आर्थिक मुश्किलें तेजी से बढ़ सकती हैं। कोटक ने कहा कि कंपनियों और सरकार को पहले से ही सतर्क रहना होगा और हर तरह के बुरे हालात से निपटने के लिए तैयारी करनी होगी।

उदय कोटक ने कहा कि दुनिया की सोच धीरे-धीरे बदल रही है। उन्होंने चिंता जताई कि जिस तरह पहले देशों के बीच सहयोग की प्रवृत्ति थी, वह धीरे-धीरे कम हो रही है। और दुनिया अब एक तरह के ट्राइबलिज्म की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने ट्राइबलिज्म का मतलब समझाते हुए कहा कि अब देश अपने फायदे के लिए व्यापार रास्तों और संसाधनों पर कब्जा करना चाहते हैं। उदय कोटक ने खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ मलक्का का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यहां अगर नियंत्रण हो गया तो दुनिया के दूसरे हिस्सों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। कोटक ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि भारत ज्यादा समझदारी और रणनीति से काम करे। उदय कोटक ने भारत के लिए एक चिंता वाली आशंका की तरफ भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमत $60 से बढ़कर $100 प्रति बैरल हो जाती है तो इससे भारत का चालू खाता घाटा -1 फीसदी से बढ़कर -2.5% तक जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो इससे अर्थव्यवस्था के साथ ही कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। उन्होंने हिदायत दी कि सरकार, कंपनियों और लोगों को पहले से ही सतर्क होना होगा। सरकार को कम खर्च में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और ज्यादा काम करने पर ध्यान देना होगा।


कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक का ये बयान प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद आया है। बता दें कि 10 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश से अपील की थी कि लोग कम से कम एक साल के लिए सोना खरीदना बंद कर दें। पेट्रोल और डीजल का सीमित इस्तेमाल करें। जरूरत पड़े तो वर्क फ्रॉम होम किया जाए। उन्होंने लोगों को घर में तेल भी कम इस्तेमाल करने की हिदायत दी है।

क्या बोली सरकार?
प्रधानमंत्री मोदी की 10 मई की अपील के बाद 11 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह की बैठक हुई। इसमें सरकार ने स्थिति साफ करते हुए बताया कि देश में किसी तरह की कमी नहीं है। सरकार की तरफ से जानकारी दी गई है कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों का प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक है। वहीं, विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर है। सरकार की तरफ से यह भी जानकारी दी गई कि तेल कंपनियों को रोज करीब एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। और यह नुकसान इसलिए हो रहा ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ देश के नागरिकों पर ना डाला जाए।

पीएम मोदी की अपील के मायने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपील करना कोई छोटी घटना नहीं है। यह एक इशारा है कि आने वाले दिनों में बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। अर्थशास्त्री और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष वेद जैन बीबीसी हिंदी से बात करते हुए बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के संदेश का सार यही निकलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इस समय एक बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। जैन इसे कोविड जैसी स्थिति के रूप में देखने की बात भी कहते हैं। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति सिर्फ भारत के लिए खड़ी हो रही है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की वजह से मध्य पूर्व में हालात सुधरने की बजाय बिगड़ते ही जा रहे हैं। मध्य पूर्व में अगर हालात तनावपूर्ण रहते हैं तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर आएगा। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और धीरे-धीरे भारत पर भी इसका असर पड़ने लगा है। जैन कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का तेल, सोना कम खरीदना और विदेश यात्रा कम करने की अपील दरअसल विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने की कोशिश है।

सोना बिकेगा, बोझ बढ़ेगा !
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर हम एक साल तक सोना ना खरीदें तो विदेशी मुद्रा भंडार में हम काफी बचत कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ये अपील यूं ही नहीं है। भारत बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है। 2025-26 में भारत ने $71.98 अरब का सोना आयात किया था। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 24% ज्यादा था। अब जब भारत सोना (या कोई दूसरी चीज भी) आयात करता है तो हम डॉलर में भुगतान करते हैं। इससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार कम होता है। नतीजा रुपए पर दबाव बढ़ता है। सिर्फ यही नहीं, अगर जिस मात्रा में आयात हो रहा है, उसी अनुपात में अगर निर्यात नहीं हो रहा तो इसका सीधा असर चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए PwC इंडिया में इकोनॉमिक एडवाइजरी सर्विसेज के पार्टनर और लीडर रानेन बनर्जी कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि लोग नॉन-प्रोडक्टिव एसेट्स (ऐसी संपत्तियां जो कोई आय/फायदा नहीं देती) ना खरीदें ताकि इसे प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट में लगाया जा सके। बनर्जी कहते हैं कि हम उम्मीद करते हैं कि लोग प्रधानमंत्री मोदी की अपील सुनें और धीरे-धीरे गहने खरीदना कम करें। वह कहते हैं कि 3-5 साल में यह ट्रेंड फायदेमंद साबित हो सकता है।

अमेरिकाईरान युद्ध से बढ़ा संकट
अमेरिका और ईरान के बीच जिस तरह खींचतान जारी है, उस तरह इसके खत्म होने के आसार जल्द नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों देश शांति वार्ता तो करना चाहते हैं लेकिन एक-दूसरे के प्रस्ताव को कोई भी स्वीकार नहीं कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप अपना संयम खोते जा रहे हैं और वह फिर ईरान पर हमला करना शुरू कर सकते हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर यूएस-ईरान के बीच जारी ये संकट लंबा चलता है तो दुनियाभर के लिए काफी मुश्किल हो सकती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हालात अगर यूं ही बने रहे तो भारत सरकार को आगे चलकर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। सिर्फ यही नहीं, सरकार को सोने के आयात पर नियंत्रण करना पड़ सकता है। साथ ही कुछ चीजों की राशनिंग करने जैसे कई कदम उठाने पड़ सकते हैं। ऐसा करना इसलिए जरूरी होगा ताकि अर्थव्यवस्था को संभालने का काम किया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को सभी को अपनाना चाहिए। जितना संभव हो सकता है, उतना। सरकार भी यही कह रही है। सरकार का कहना है कि ये जो एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ये किसी तत्काल संकट की वजह से नहीं हैं। सरकार का कहना है कि ये लंबी अवधि की तैयारी के लिए है। साथ ही सरकार ने कहा है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की बात मानें लेकिन थोड़ी सावधानी भी बरतें। कई बार छोटे-छोटे कदम बड़े संकट को टालने में बड़े कारगर साबित होते हैं। ऐसे में जहां संभव हो वहां पर कदम उठाएं ताकि आप भी मध्य पूर्व में उठे बवंडर के असर को भारत की अर्थव्यवस्था पर कम करने में मदद कर सकें।

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