उत्तराखंड में भूत बीड़ी क्यों मांगता है?
भूत बीड़ी क्यों मांगता है?
अगर आपका बचपन उत्तराखंड में बीता है तो आपने अक्सर अपने दादा-दादी से कहानियां सुनी होंगी। कहानियां पहाड़ के संघर्ष की। पहाड़ की नारियों की और पहाड़ के देवताओं की। आप अपने बचपन को याद करेंगे तो हर किसी के लिए ये कहानियां अलग-अलग हो सकती हैं। लेकिन एक कहानी है जो लगभग सभी पहाड़ियों ने सुनी होगी। और ये कहानी है- भूत के बीड़ी मांगने की। कई लोगों के जेहन में अपने दादा की याद होगी जिन्होंने बताया था कि एक बार वह जंगल में गए थे तो वहां उनसे भूत ने बीड़ी मांग ली। किसी ने अपने पिताजी से यह कहानी सुनी होगी। जिसमें उन्होंने बताया होगा कि एक दिन बण (जंगल) में उन्होंने बीड़ी सुलगाई ही थी कि सामने से एक अदृश्य आवाज आई- मुझे भी बीड़ी दे दे।
भूत के बीड़ी मांगने की ये कहानियां उत्तराखंड के लोक में रची-बसी हुई थीं। आज आधुनिक होते युग में भले ही दादा-दादी और नाना-नानी की कहानियां गायब सी हो गई हों लेकिन इन कहानियों की धूमिल सी याद आज भी पुराने लोगों के मस्तिष्क में हैं। आज का जेन ज़ी भले ही इन कहानियों से शायद ना जुड़े लेकिन जिन्होंने 90 और 2000 तक का दशक भी उत्तराखंड में अपने पहाड़ों के बीच बिताया है, उनके लिए यह कहानी नॉस्टेलिजिया फील होगा। खैर, हम यहां पर भूत के बीड़ी मांगने के नॉस्टेलिजिया से ज्यादा इस कहानी के पीछे के कारण जानने की कोशिश इस रिपोर्ट में कर रहे हैं।
आपने कभी सोचा है कि आखिर भूत बीड़ी क्यों मांगता है? जवाब तो हम आपको देंगे ही लेकिन उसके साथ यह भी जान लीजिए कि बीड़ी मांगने वाला यह भूत सिर्फ पहाड़ तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग कोनों में आपको इस भूत की कहानियां मिल जाती हैं। क्षेत्र बदलने के साथ बीड़ी के अलावा सिगरेट का जिक्र भी कहानी में शामिल हो जाता है। लेकिन जब हम उत्तराखंड की बात करते हैं तो यहां पर सिर्फ भूत ही नहीं बल्कि देवता भी बीड़ी-सिगरेट मांगते हैं। लेकिन सवाल वही है कि आखिर भूत के बीड़ी मांगने के पीछे का क्या कारण है? क्या यह अंधविश्वास है या फिर कोई भ्रम? विज्ञान इसको लेकर क्या कहता है? हर सवाल का जवाब इस रिपोर्ट में लेते हैं।
भूत के बीड़ी मांगने की कहानी
जैसे हमने बताया कि बीड़ी मांगने वाला यह भूत सिर्फ उत्तराखंड में नहीं है बल्कि इसके कई प्रदेशों में ठिकाने हैं। भारत के लगभग हर राज्य में आपको बीड़ी-सिगरेट मांगने वाले भूत की कहानी मिल जाता है। उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश, झारखंड समेत बिहार व अन्य कई राज्य इस लिस्ट में शामिल हैं। उत्तराखंड की बात करें तो यहां पर सिर्फ रैंडम भूत के बीड़ी मांगने की कहानियां प्रचलित नहीं हैं। कुछ फेमस लोग भी हैं जिनको लेकर कहा जाता है कि उनकी आत्माएं भी बीड़ी-सिगरेट मांगती हैं। उत्तराखंड की हर्षिल घाटी में एक ऐसे ही भूत की कहानी प्रचलित है। यहां पर 1860 के दशक में एक अंग्रेज आया था जिसका नाम फ्रेडरिक विल्सन था। कई इन्हें इस घाटी के राजा के तौर पर देखते हैं तो कई इन्हें अत्याचारी भी मानते हैं। अब इन दोनों बातों का सच क्या है, वो आप हमारी इस रिपोर्ट को देखकर जान सकते हैं लेकिन कहा जाता है कि विल्सन का भूत आज भी रातों को अपने घोड़े में बैठकर घूमता रहता है। और जब कोई राहगीर उसे मिलता है तो वह उससे अपना सिगार जलाने के लिए लाइट मांगता है।

मसूरी का बीड़ी मांगने वाला भूत
कुछ इसी तरह की कहानी मसूरी में भी प्रचलित है। एक कहानी के मुताबिक यहां पर कभी एक बहुत ही गरीब आदमी रहता था। वो इतना गरीब था कि चाय की इस्तेमाल की गई पत्तियों को सुखाकर फिर उन्हें उपयोग में लाता। कहते हैं कि मरने के बाद भी उसकी गरीबी नहीं गई और वो आज भी राहगीरों से सिगरेट मांगता है। जो उसे सिगरेट देने से इनकार करता है, उसे वो थप्पड़ जड़ देता है।
बीड़ी मांगने वाले देवता
इसी तरह उत्तराखंड में कई जगहों पर पूजे जाने वाले सैद को लेकर भी यही प्रचलित है। कहा जाता है कि सैद सफेद घोड़े पर सवार होकर घूमता है और वह आने-जाने वालों से बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू मांगता है। मान्यता तो ये भी है कि सैद को बीड़ी-सिगरेट चढ़ाने पर वह काफी प्रसन्न होते हैं और देने वाले को समृद्ध कर देते हैं। सिर्फ सैद ही नहीं बल्किकई देवताओं को भी बीड़ी-सिगरेट चढ़ाए जाने की परंपरा पहाड़ों में नजर आती है। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में स्थित रथी देवता को भी सिगरेट चढ़ाई जाती है। हालांकि इन देवताओं का कोई ना कोई कनेक्शन भूत होने से जरूर है। रथी देवता के बारे में कहा जाता है कि ये एक इंसान ही थे जो बाद में देवता बन गए। उत्तराखंड में आपको ऐसे कई देवता और भूत मिल जाएंगे जो बीड़ी और सिगरेट मांगते हैं। हालांकि ये सभी उस भूत से अलग हैं जो जंगलों-दूरस्थ जगहों पर हमारे बुजुर्गों को मिलता है और बीड़ी मांगता है।

भूत बीड़ी क्यों मांगता है?
अब सवाल उठता है कि ये भूत कहां से आया तो चलिए अब इसका जवाब पहले संभावनाओं के जरिए और फिर विज्ञान की नजर से तलाशते हैं। वैसे तो भूत के बीड़ी मांगने की कहानी कई जगहों पर सुनाई देती है लेकिन उत्तराखंड में ये काफी ज्यादा फेमस है। ऐसा इसलिए क्योंकि गांव के बुजुर्गों ने कभी ना कभी ये कहानी अपने नाती–पोतों को सुनाई होती है। बस क्षेत्रवार कहानी में थोड़ा–थोड़ा बदलाव नजर आता है।
जो कहानी मैंने सुनी है, पहले वो मैं आपको सुनाता हूं। मुझे ये कहानी मेरे पिता जी ने सुनाई थी तो मैं उन्हीं की जुबान बनकर आपको सुनाने की कोशिश कर रहा हूं। एक दिन मैं बल्दू ब्यौपारी (बैलों का व्यापारी) गया हुआ था। पुराने वक्त में सड़के नहीं हुआ करती थीं तो जंगल के रास्ते से ही मैं पैदल जा रहा था। काफी वक्त पैदल चलने के बाद जब मुझे थक लगी तो मैं एक सौड़ यानी घास के मैदान पर आराम करने बैठ गया। वहां पर मैंने बीड़ी निकाली और पीने लगा। जैसे ही मैंने बीड़ी का पहला कस मारा। सामने से आवाज आई- मुझे भी बीड़ी देना और जैसे ही मैंने वो अदृश्य आवाज सुनी तो मैं डर गया। मैंने आव देखा ना ताव, मैं वहां से बिना पीछे देखे भाग गया। और फिर किसी छानी में पहुंचकर ही रुका। खैर, जब इस कहानी के जवाब में मैंने अपने पिता से पूछा या आप लोगों ने भी पूछा होगा तो ज्यादातर जवाब यही मिला होगा कि ये भटकती आत्माएं होती हैं। अतृप्त आत्माएं खुद को तृप्त करने के लिए बीड़ी मांगती हैं। पहाड़ों में एक वजह ये भी गिनाई जाती है कि जिनकी मौत ठंड की वजह से हुई होती है वही भूत बीड़ी मांगते हैं।
भूत में ना मानने वालों का तर्क
ये तो वो तर्क हो गए जो भूतों में विश्वास करने वाले देते हैं लेकिन जो भूतों में विश्वास नहीं करते वो तर्क देते हैं कि कभी किसी एक व्यक्ति ने कुछ बच्चों के शगल के लिए ये कहानी सुना दी होगी। और फिर जब वो बच्चे बड़े-बूढ़े हुए तो उन्होंने उस कहानी का अपना वर्जन बनाकर अपने नाती-पोतों को सुनाया और इस तरह भूत के बीड़ी मांगने वाली ये कहानी निरंतर सुनी और सुनाई जाने लगी। अब हर शख्स अपने हिसाब से सोचता है और कोई जवाब तैयार करता है।
क्या कहता है विज्ञान?
भूत के बीड़ी मांगने वाले सवाल का जवाब लेने से पहले एक तस्वीर देखिए। इस तस्वीर में आपको क्या नजर आ रहा है?

99% लोगों को पहली नजर में ये इंसान का चेहरा लगेगा लेकिन ऐसा है नहीं। ये तस्वीर दरअसल चांद की सतह की है जिसे नासा ने जारी किया था। जब ये तस्वीर जारी हुई थी तो लोगों ने कहा कि ये किसी एलियन का चेहरा लेकिन ये सिर्फ चट्टाने हैं और कुछ नहीं। अक्सर जब आप सन्नाटे में बैठे होते हैं। कई बार आपको लगता है कि कोई आपका नाम पुकार रहा है। कई बार आपको पत्थरों और दूसरी चीजों पर कोई आकृति नजर आ जाती है। बस कुछ यही जवाब (विज्ञान भूत के बीड़ी मांगने के सवाल में देता है। रैंडम चीजों में जानी-पहचानी आकृति देखने को विज्ञान की भाषा में पेरीडोलिया वहीं, कई बार जब आपको कुछ आवाजें सुनाई देती हैं तो उसे ऑडिटरी पेरीडोलिया (auditory pareidolia) कहा जाता है।

लाइव साइंस ने एक एक्सपर्ट के मुताबिक पेरीडोलिया का मतलब समझाया है। एक्सपर्ट के मुताबिक दिमाग एक कंप्यूटर की तरह है। इसमें आवाज, तस्वीर, शब्द वगैरह का तमाम डाटा फीड है। ये डाटा हमारी जिंदगी भर के अनुभव से यहां पर जमा हुआ है। जो कुछ भी हमने कहीं सुना है और देखा है, वो दिमाग में फीड किया गया है। इससे दिमाग एक पैटर्न बना लेता है। लेकिन ये जरूरी नहीं है कि वो जो पैटर्न बना है, वो हमेशा सही हो या दिमाग उसकी सही पहचान कर पाए। एक्सपर्ट कहते हैं कि जंगल में जब कोई आवाज सुनता है तो हो सकता है कि वो जंगल की ही किसी आवाज का हिस्सा हो। हमारा दिमाग उसमें अपना जाना-पहचाना पैटर्न बना ले। वहीं, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोलॉजिस्ट एंड्रयू किंग बताते हैं कि ज्यादातर शोर की आवाजों में पैटर्न बदलते रहते हैं। फर्ज करिए कोई आवाज है जो वैसे तो एक सी सरसराहट से आ रही है। लेकिन एक समय में अगर उसके पैटर्न में थोड़ा बदलाव हो जाए। और ये बदलाव काफी होगा कि हमारा दिमाग किसी पहचानी आवाज या नाम से जोड़कर इसे हमें सुना दे।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हमारा दिमाग लगातार ये कोशिश करता है कि वो किसी पैटर्न का जाना-पहचाना मतलब निकाल सके। इस प्रोसेस को कांट्रास्ट गेन कंट्रोल कहा जाता है। इसमें हमारा दिमाग कोशिकाओं की संवेदनशीलता के साथ थोड़ा बदलाव करता है ताकि लगातार आ रही एक सी आवाज या दृश्य के हिसाब से एडजस्ट कर सके। ये कुछ उसी तरह है जैसे कि अंधेरे में हमारी आंखें एडजस्ट करने की कोशिश करती हैं।
अब विज्ञान के इस जवाब को आप बीड़ी मांगने वाले भूत के संदर्भ में देखें तो एक तर्क ये हो सकता है कि वो भूत हमारी भाषा में, हमारी जानी-पहचानी चीज ही मांगता है। ये जग-जाहिर है कि पहाड़ों में क्या, पूरे भारत में स्मोकिंग के लिए बीड़ी का काफी ज्यादा इस्तेमाल होता है। ऐसे में किसी अनजान आवाज का किसी इंसान का लगना और उसका बीड़ी मांगना दिमागी खेल भी हो सकता है। क्योंकि इसी पेरीडोलिया की वजह से कई बार हमें लगता है कि कोई हमें बुला रहा है। या कोई हमें दिख रहा है। दिखने का सबसे बड़ा उदाहरण दुनिया के वो पहाड़ हैं जो किसी की आकृति की तरह दिखते हैं। लेकिन हैं वो चट्टानें ही। बस हमारे दिमाग ने उन्हें अपने डाटा में मौजूद किसी छवि के नजदीक पा लेता है तो वह उसे उसी रूप में देख रहा है।
इस तरह विज्ञान के नजरिए से भूत बीड़ी क्यों मांगता है सवाल का जवाब देखें तो लगता है कि ये सिर्फ हमारे दिमाग का फितूर है जो किसी सुनसान इलाके और एकांत में हमको दिखाई देने और सुनाए देने का आभास होता है। खैर, अब ये बीड़ी मांगने वाले भूत है भी या नहीं, इस सवाल के जवाब पर तर्क-कुतर्क हो सकते हैं। कुछ मान्यताओं के आधार पर तो कुछ विज्ञान के भरोसे। लेकिन एक चीज है जिसे कोई नहीं नकार सकता। कम से कम पहाड़ी तो नहीं कि बीड़ी मांगने वाले भूत की कहानी हमारे जेहन से कभी ओझल नहीं हो सकती। अब अगली पीढ़ी को शायद ये बीड़ी मांगने वाले भूत की कहानी सुनने को ना मिले क्योंकि जिस तेजी से पहाड़ खाली हो रहे हैं तो वहां पर भूत के लिए भी कोई साथी नहीं है कि जिससे वो बीड़ी मांग सके।
