1700 से ज्यादा गांव में एक भी इंसान नहीं, संसद में उठा पलायन का मुद्दा
पहाड़ी गांव (प्रतीकात्मक तस्वीर)
उत्तराखंड में पलायन की मार कितनी भयावह हो गई है, इसकी एक तस्वीर आज संसद में पेश की गई। नैनीताल और ऊधम सिंह नगर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट ने लोकसभा में उत्तराखंड के खाली होते गांवों का मुद्दा उठाया। शून्यकाल में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पलायन की वजह से उत्तराखंड के सैकड़ों गांव खाली हो गए हैं। उन्होंने 2025 में आई पलायन आयोग की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि उत्तराखंड में 1700 से ज्यादा ऐसे गांव हैं, जहां पर अब एक भी इंसान नहीं रहता। उन्होंने बताया कि लोग अब इन गांवों को घोस्ट विलेज या भूतिया गांव कहने लगे हैं।

सांसद अजय भट्ट ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि एक वक्त था जब इन गांवों में झोड़ा, चांचड़ी और झुमेलो खेला जाता था। यहां कोई बसावट नहीं है। खेत-खलिहान उजड़ चुके हैं। जमीन बंजर पड़ चुकी है। आज यहां पर जंगली जानवरों के अलावा किसी का बसेरा नहीं है। उन्होंने कहा कि पलायन की यह स्थिति राज्य की जनसंख्या का संतुलन और ग्रामीण विकास के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अजय भट्ट ने कहा कि 2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तराखंड में 1048 ऐसे गांव थे, जहां पर कोई इंसान नहीं रहता था। अब यह संख्या लगातार बढ़ गई है। अब ऐसे गांवों की संख्या 1700 के पार पहुंच गई है।
सासंद अजय भट्ट ने संसद में कहा कि इन गांवों को फिर से गुलजार करने के लिए कदम उठाए जाएं। उन्होंने सरकार से अपील की कि जिस तरह वाइब्रेंट विलेज योजना चलाई जा रही है, कुछ उसी तरह का कार्यक्रम इन गांवों को आबाद करने के लिए चलाया जाना चाहिए। भट्ट ने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से वाइब्रेंट विलेज योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना का फायदा मिल रहा है। पलायन कम होने लगा है। हालांकि उन्होंने मध्य हिमालय के गांवों में पलायन बढ़ने को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने अपील की कि इसी तरह की कोई योजना लाकर इन गांवों को आबाद करने के लिए कदम उठाए जाएं। ताकि जो पलायन हो चुका है, वो खत्म हो। लोग वापस अपने घरों को लौटें और अपने घर-बार, जमीन-जायदाद को आबाद करें।
संसद में जिस समय अजय भट्ट ने यह मुद्दा उठाया है, उसी समय पलायन की मार की एक खबर सामने आई है। बागेश्वर जिला से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर बसा है भयेड़ी गांव। मुख्य बाजार से इतने नजदीक होने के बावजूद यह गांव पलायन की मार झेल रहा है। 110 घरों की आबादी वाला यह गांव अब धीरे-धीरे खाली हो रहा है। जहां कभी 100 से ज्यादा परिवारों का बसेरा था, अब वहां सिर्फ 52 परिवार ही रह गए हैं। आज अगर आप इस गांव में जाएंगे तो आपको बंद पड़े मकान और जंग लगे ताले अवश्य नजर आ जाएंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चार-पांच दशक से यहां से पलायन काफी तेज हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की कमी निकल कर आई है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सुख-सुविधाएं ना होने की वजह से लोग शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं और इसी वजह से धीरे-धीरे गांव खाली होते जा रहे हैं।
