उत्तराखंड में जनगणना की शुरुआत, पहले गिने जाएंगे घर

उत्तराखंड में जनगणना

उत्तराखंड में जनगणना

उत्तराखंड में जनगणना की शुरुआत 10 अप्रैल यानी शुक्रवार से हो जाएगी। जनगणना के पहले चरण के तहत भवनों की स्व-गणना की जाएगी। इस पहले चरण को उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह(सेनि) हरी झंडी दिखाएंगे। इस काम को करने के लिए 4491 सुपरवाइजर और 26 हजार से ज्यादा प्रगणक तैनात होंगे। कुल मिलाकर 30 हजार से ज्यादा लोगों की टीम इस काम में शामिल होगी। ये लोग 25 अप्रैल से 24 मई के भीतर घर-घर जाकर मकान की लिस्टिंग करेंगे साथ ही मकानों की गणना भी करेंगे।

जनगणना के सचिव दीपक कुमार ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी। वहीं, निदेशक आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना के प्रथम चरण में मकानों की गणना करके सूची तैयार की जाएगी। इस काम को पूरा करने की समयसीमा 25 अप्रैल से शुरू होगी और 24 मई तक चलेगी। हालांकि इससे पहले आप खुद चाहें तो स्वगणना कर सकते हैं। श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक यह सुविधा मिलेगी। se.census.gov.in पोर्टल पर स्व गणना की जा सकेगी। इस पोर्टल पर जब आप जाएंगे तो आप 16 क्षेत्रीय भाषाओं में स्व गणना के सवालों का जवाब दे सकते हैं। इवा श्रीवास्तव ने बताया कि दूसरे चरण में उत्तराखंड के हिमाच्छादित जिलों (चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी) के 131 गांव और तीन नगरीय क्षेत्रों में जनगणना का कार्य 11 से 30 सितंबर के बीच किया जाएगा।

खाली पड़े मकान भी होंगे दर्ज
ये बात किसी से छुपी नहीं है कि उत्तराखंड के 1700 से ज्यादा गांव भूतिया हो चुके हैं। इसके अलावा कई गांवों में कई मकान हैं जो खाली पड़े हैं। अब मकानों की जनगणना में क्या इन्हें शामिल किया जाएगा या नहीं? इस सवाल के जवाब में बताया गया है कि इनकी भी गणना होगी। जनगणना की टीम जब वहां जाएगी तो उन घरों को उसी हिसाब से अपने डाटा में फीड कर देगी। जो घर बंद होंगे उन्हें लॉक्ड हाउस के रूप में एंट्री की जाएगी।

स्वगणना में शामिल होने की अपील
जनगणना के सचिव दीपक कुमार ने लोगों से स्वगणना में शामिल होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा लोग 10 अप्रैल से शुरू होने वाली स्व-गणना में शामिल हों। कल यानी शुक्रवार से इसकी शुरुआत खुद राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि इस जनगणना का काम पूरी तरह से एक मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा स्वगणना आप पोर्टल पर भी कर सकते हैं। इसमें आपको एक यूनिक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी (एसई आईडी) मिलेगी। इस आईडी को आपको प्रगणक को देना होगा। जब आप उस आईडी को प्रगणक एवं पर्यवेक्षक को देंगे तो वह अपने मोबाइल फोन की मदद से आंकड़ों का संकलन करेगा। इस तरह संचालन, पर्यवेक्षण एवं प्रबंधन के लिए जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस पोर्टल) का उपयोग किया जाएगा।

उत्तराखंड के लिहाज से यह जनगणना काफी महत्वपूर्ण है। इस जनगणना में यह सामने आ सकता है कि पहाड़ में कितने घर खाली हैं। एक बार अगर खाली घरों की जानकारी मिल जाती है तो संभव है कि सरकार इसके मुताबिक कोई कार्ययोजना बनाए और पहाड़ों के लिए अलग नीति बन सके। इसके अलावा 2027 में लंबित परिसीमन में भी पहाड़ के लिहाज से इस प्रक्रिया में भी पहाड़ को कुछ राहत मिले। 

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